Institute Page

संस्थागत लक्ष्य और उद्देश्यों को प्राप्त करना

आज दुनिया ‘योग्य कार्य के लिए योग्य व्यक्ति’ के सिद्धांत में विश्वास रखती है। जब कोई संस्था प्रत्येक विद्यार्थी का उसके वैयक्तिक गुणों, क्षमताओँ और कौशलों के आधार पर प्रभावशाली मार्गदर्शन करने और उसका विकास करने में जुटती है, तब इसमें तनिक भी संदेह नहीं रह जाता कि उस संस्था के विद्यार्थी अपने जीवन में अद्भुत सफलता प्राप्त करेंगे और अपनी संस्था को सम्मान तथा देश को गौरव प्रदान करेंगे।

देखा गया है कि केवल 'सामान्य पाठ्यक्रम आधारित विकास दृष्टिकोण’ की तुलना में, प्रत्येक विद्यार्थी के संस्कार क्षम कालखंड के दौरान, उसकी निजी विशेषताओं और कौशलों को पहचानकर उसमें वृद्धि करना निःसंदेह अधिक प्रभावशाली सिद्ध हुआ है। यह दृष्टिकोण, संस्थाओं को न केवल महत्वपूर्ण परीक्षाओं और प्रतियोगिताओं में शैक्षिक सफलता हासिल करने में मदद करता है, बल्कि विद्यार्थियों का ‘संपूर्ण विकास' करने में और मूल्य प्रणाली के प्रति प्रतिबद्ध जिम्मेदार नागरिकों का भी निर्माण करने में सहायता करता है।

शैक्षिक यश

१० वी की परीक्षा हर स्कूल के लिये एहमियत राखती है क्यों की इसी के परिणाम स्कूल का दर्जा समाज में नापा जाता है I यह परीक्षा उच्च शिक्षा के दरवाजेपर विद्यार्थियों को जा पहुंचाती है I स्कूल के विद्यार्थीयों का इस परीक्षा में अच्छे गुण पाना स्कूल के शैक्षिक यश का एक महत्वपूर्ण मापन समझा जाता है I

संस्थागत सकल विकास

हर शैक्षिक संस्था चाहेगी की उनके विद्यार्थीयों का शैक्षिक और सम-शैक्षिक अनुक्षेत्र में सर्वंकष मूल्यांकन उपलब्ध हो जिसके तहत शिक्षा प्रणाली का नतीजा दृश्य हो सकें I हर विद्यार्थी का सकल विकास हासील करने के लिये कौशल और योग्यताओं को इस तरह से बढावा देने की आवश्यकता होगी की यह छात्र सृजनशील, प्रवर्तनशील, विश्लेषी, तर्क-संगत और समस्या का समाधान करानेवाले बने I

“जिम्मेदार नागरिकत्व” विकास

"(मनुष्य के लिये) सिर्फ बुद्धी काफ़ी नही है; बुद्धी और चारित्र्य विकसित करना यही शिक्षा का उद्देश्य है"
            — मार्टिन लुथर किंग (जुनिअर)
हर शैक्षिक संस्था की जिम्मेदारी है की वो अपने विद्यार्थीयों को आनेवाले कल के लिये जिम्मेदार नागरिक बनायें I उन्हें अपने विद्यार्थीयों को हर भावना मेहसूस करना, (योग्य) विचार करना और सही कार्य करना सिखाना है - अपने खुद के लिये ही नही, बल्की औरों के लिये भी!

एंटेल्की की "पेरिशिया" प्रणाली के बारे में

हर शैक्षिक संस्था को उपर लिखे हुए उद्देशों को योग्य परिणाम देने के साहुलीयत हेतु एंटेल्की ले आयी है "पेरिशिया" नामक प्रणाली जो बहुभाषीय है और जिसकी तहत विद्यार्थीयों का कौशल तथा क्षमता विकास कराया जा सकता है I यह प्रणाली का कार्य विश्वमान्य ढंग - "नियोजन - काम करना - जांच-पडताल और सुधार कारवाही" से किया जाता है जिस में विद्यार्थीयों में विश्लेषण क्षमता, तार्किक क्षमता, कारण मीमांसा, भाषा नैपुण्य, गणितीय नैपुण्य, एकाग्रता, स्मरण शक्ती, समय का ध्यान, सामाजिकता इत्यादी गुणों का चयन किया जाता हैI यह सारे कौशल और क्षमता विविध क्रिया - कलापों द्वारा विकसित किये जाते हैं और विद्यार्थी इन क्रिया-कलापों को बेहद चाहते हैं I
यह क्रिया खेल जैसीं हैं I इन क्रिया- कलापों का लगातार मूल्यांकन किया जात है जिसकी माध्यम से निजी विद्यार्थी की, पुरे क्लास की और समुचे स्कूल की प्रगती आजमाई जा सक्ती है I

एंटेल्की के "जीवन दिशा" प्रणाली के बरे में

शिक्षा पाने के उपरांत हर विद्यार्थी व्यवसाय तथा रोजगार कि ओर कदम बढाता है I तकनिकी उपलब्धीयों के बढने की वाजह से आज पुरे विश्व में रोजगार के अनेक मार्ग उपलब्ध हैं I इस विस्तृत रोजगार संभवता के अनुक्षेत्र में जानकारी पर आधारित योग्य निर्णय लेना जरूरी है; पर आज के परिवर्तनशील युग में जवान विद्यार्थीयों को रोजगार क्षेत्र की अनिश्चितता सताति है I अक्सर, सपनों में और वास्तव में भारी अंतर नज़र आता है I
'जीवन दिशा' प्रणाली, एक संगणक द्वारा दी जानेवाली टेस्ट है, जो वैज्ञानिक आधार पर मानव अनुसंधान विशेषज्ञ और मनोवैज्ञानिकों नें विकसित की है I यह टेस्ट उच्च माध्यमिक और महाविद्यालयीन विद्यार्थीयों के लिये प्रमाणित हैI और इस टेस्ट के तहत परीक्षार्थीयों को ३४ + क्षमता और कौशलों के बारे में उनके निजी बलस्थान तथा कमजोरीयों का विश्लेषण दर्शाया जाता है और उसके उपरांत १० सबसे योग्य रोजगार मार्ग दर्शाये जाते हैं I सिर्फ इतनाही नही, बल्की कमजोरीयों से निपटने के मार्ग भी सुझाये जातें हैं I

एंटेल्की प्रोफाइलिंग और व्यवसाय मार्गदर्शन परीक्षा

प्रमाण पत्र

कक्षा में दिलचस्पी और आनंद बढ़ा।

इस उपक्रम से छात्रों को कुछ करने की प्रेरण मिली। एकाग्रता, नेतृत्व विकास , शब्दसंग्रह मे बढ़ोतरी हो गयी। अंग्रेजी लेखन, वाचन मे सुधार हुआ।

बाहरी वाचन , सामान्य ज्ञान प्राप्त करने की इच्छा जागृत हुई। कक्षा में दिलचस्पी और आनंद बढ़ा।“

- श्रीमति. शुभदा साठे. प्रधानाध्यापिका, विद्यालय क्र. 8, भागेश्वर विद्यामंदिर. रत्नागिरी.

एक अति उत्तम योजना है और हमारे सभी स्कूलों का एक हिस्सा बनना चाहिए।

स्वतंत्र विचार करने की क्षमता, बोध, विवेक और जिज्ञासा में सुधार हुआ है। उनका आत्मविश्वास सुधर गया है। छात्र जो अपने आपमें उलझे हुए रहते थे, वे अब कक्षा के उपक्रमों में शामिल हो रहें हैं।

ज्ञान का स्तर बढ़ गया है और उनकी पढ़ाने के तरीकों के अच्छे सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं। छात्रों की पढ़ने की उत्सुकता में सुधार आया है। शिक्षक उनकी कक्षा में पढ़ाने मे उत्साह महसूस कर रहे है।

- श्रीमति. रंजना तासकर, उपाध्यक्षा, उषाताई लोखण्डे ट्रस्ट